दिल्ली में भारत-यूके के संयुक्त सम्मेलन ने ग्रीन हाइड्रोजन की सुरक्षा और नियमन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का संकल्प लिया। मंत्रालय ने बताया कि यह पहल राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है, जो देश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।
कार्यक्रम में विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञ एकत्र हुए—सरकार से लेकर निजी क्षेत्र, शिक्षा संस्थान, मानकीकरण निकाय, लैब और नियामक एजेंसियां। फोकस रहा हाइड्रोजन चेन के हर पहलू पर—निर्माण, संग्रहण, वितरण और अंतिम प्रयोग की सुरक्षित व्यवस्था।
राष्ट्रीय हाइड्रोजन सुरक्षा केंद्र के नेतृत्व में ब्रिटिश दूतावास व विश्व संसाधन संस्थान के समर्थन से संपन्न यह आयोजन डॉ. मोहम्मद रिहान के उद्घाटन भाषण से शुरू हुआ।
डॉ. परविंदर मैनी ने जोर देकर कहा कि स्केल-अप के लिए सुरक्षा फ्रेमवर्क, मानक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य हैं। पीईएसओ ने अनुपालन, रिस्क असेसमेंट और सिस्टम प्रबंधन पर अपनी नियामक भूमिका स्पष्ट की।
मानक ब्यूरो ने वैश्विक प्रथाओं से सामंजस्य स्थापित करने की प्रक्रिया साझा की। सत्रों में उद्योगजनों ने सुरक्षित प्लांट डिजाइन, स्टोरेज तकनीक और सेंसर-आधारित मॉनिटरिंग पर प्रकाश डाला।
पिछली घटनाओं के सबक और नई तकनीकों पर विचार-विमर्श से सुरक्षा को और सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह मंच दोनों राष्ट्रों को हरित ऊर्जा में अग्रणी बनाने की दृढ़ प्रतिबद्धता दर्शाता है, जो वैश्विक पर्यावरण लक्ष्यों को साकार करेगा।