भारत का रसायन क्षेत्र तेजी से प्रगति की राह पर है। 2030 तक वैश्विक बाजार में 5-6 प्रतिशत हिस्सेदारी और 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर टर्नओवर का सपना साकार करने की दिशा में सरकार कदम तेज कर रही है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि बायो-फार्मा पावर स्कीम व तीन रसायन पार्कों हेतु 13,000 करोड़ रुपये का बजटीय समर्थन रणनीतिक कदम है।
वेबिनार में उन्होंने कहा कि 2035 तक 40 प्रतिशत दवाएं बायोलॉजिक्स होंगी। 300 अरब डॉलर पेटेंट समाप्ति के दौर में बायोफार्मा मिशन के जरिए भारत इस क्षेत्र में अग्रणी बनेगा, जिसके लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
बायोसिमिलर बाजार में 1 प्रतिशत हिस्सा भी 2 लाख करोड़ रुपये सालाना का अवसर देगा। एनआईपीईआर को मजबूत कर 1,000 क्लीनिकल ट्रायल साइट्स बनाने से अनुसंधान को बल मिलेगा। सीडीएससीओ को सशक्त बनाकर नियामक प्रक्रियाओं में तेजी लाई जाएगी।
देश का रसायन उद्योग फिलहाल 19.4 लाख करोड़ का उत्पादन करता है, डाई व एग्रोकेमिकल्स में मजबूत लेकिन वैश्विक हिस्सा 3 प्रतिशत। ढांचागत कमियों को 3,300 करोड़ से तीन पार्क बनाकर दूर किया जाएगा, जो प्लग-एंड-प्ले, अपशिष्ट उपचार, लॉजिस्टिक्स व सुरक्षा से लैस होंगे।
इनसे 20-40 प्रतिशत लागत बचत और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा। यह निवेश भारत को रसायन क्षेत्र में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करेगा।