फरवरी में भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने चार महीनों की सबसे मजबूत छलांग लगाई, जब एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 56.9 पर पहुंचा। जनवरी के 55.4 से यह बढ़ोतरी एसएंडपी ग्लोबल के आंकड़ों में घरेलू मांग की तूफानी रफ्तार को उजागर करती है।
नए ऑर्डरों में पिछले अक्टूबर के बाद सबसे तेज उछाल आया, जिसने उत्पादन को चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया। यह वृद्धि लंबी अवधि के औसत को पीछे छोड़ गई। दक्षता सुधार, नए कॉन्ट्रैक्ट और निवेश ने इसे संभव बनाया।
एचएसबीसी की प्रांजुल भंडारी ने टिप्पणी की, ‘फरवरी में क्षेत्र की गतिविधियां जोर पकड़ गईं। घरेलू ऑर्डरों ने लगातार दूसरे महीने उत्पादन को गति दी।’
निर्यात के मोर्चे पर निराशा बरकरार रही। नए निर्यात ऑर्डरों की रफ्तार 17 महीनों की सबसे कम हो गई, जो मध्य-2024 से चली आ रही कमजोरी को दर्शाती है। नौकरियों पर इसका हल्का प्रभाव पड़ा।
विपणन प्रयास, ग्राहक जरूरतें और बाजार की मजबूती ने घरेलू कारोबार बढ़ाया। लागत में मध्यम वृद्धि रही, जबकि बिक्री मूल्य ऐतिहासिक औसत से ऊपर चढ़े। एशिया, यूरोप आदि से मांग आई, लेकिन कुल निर्यात फीका रहा।
पीएमआई एक व्यापक संकेतक है जो क्षेत्र की सेहत मापता है। घरेलू ताकत के दम पर विनिर्माण क्षेत्र आगामी विकास के लिए तैयार नजर आ रहा है।