क्या आपने कभी सोचा कि अंतरिक्ष से पृथ्वी कैसी दिखती होगी? आईएसएस से देखें तो नीला ग्रह नहीं, बल्कि चमकीली रोशनी का घेरा नजर आता है। लाल-हरी-बैंगनी परतें एयरग्लो हैं, जो वायुमंडल की जटिल प्रक्रियाओं को उजागर करती हैं। यह रात को आकाश में हल्की चमक बनाए रखती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि दिन में सूर्य की यूवी किरणें ऊपरी हवा के अणुओं को सक्रिय कर देती हैं। रात में प्रकाश उत्सर्जन होता है। ऑरोरा सोलर पार्टिकल्स पर निर्भर है, लेकिन एयरग्लो सूरज की सामान्य रोशनी से चलता है। आयनित कणों की टक्कर अतिरिक्त चमक पैदा करती है।
शहरों की रोशनी हटाने पर भी आकाश में चमक रहती है, जो तारों की कुल चमक का दसवां भाग है। स्पेस से पृथ्वी चमकदार बुलबुले जैसी लगती है। यह 80-650 किमी ऊंचाई के आयनोस्फियर में होता है, जहां सैटेलाइट और जीपीएस संचालित होते हैं।
हर रंग का अपना महत्व: सबसे तेज हरा ऑक्सीजन से, लाल अन्य गैसों के रिएक्शन से। ऊपर की हवा पतली होने से चमक लंबी चलती है। सूर्य ऊर्जा और पृथ्वी मौसम से यह बदलता रहता है।
यह घटना आयनोस्फियर के बदलावों को ट्रैक करती है, जैसे हवा की धारा दिखाती है। तापमान, घनत्व की जानकारी से स्पेस वेदर और धरती मौसम का कनेक्शन समझ आता है। आईएसएस तस्वीरों से वैज्ञानिक लगातार अध्ययन कर रहे हैं, जो सैटेलाइट सुरक्षा के लिए जरूरी है।