केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने तिरुवनंतपुरम में बायोटेक्नोलॉजी के भविष्य को नया आकार दिया। अक्कुलम कैंपस पर सीजीएमपी प्लांट की नींव रखते हुए उन्होंने बायोई3 नीति को भारत की लंबी अवधि की रणनीति के केंद्र में बताया, जो बायोटेक को आर्थिक, पर्यावरणीय और रोजगार विकास से जोड़ती है।
न्यूक्लियर मेडिसिन के क्षेत्र में हाल के सुधारों का स्वागत करते हुए सिंह ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर जोर दिया। न्यूक्लियर मेडिकल मिशन अनुसंधान और व्यावहारिक अनुप्रयोगों के लिए नए द्वार खोल रहा है। उन्होंने रिकॉम्बिनेंट सेल्स एंड सेंसर्स सुविधा उद्घाटित की और साइंस डे शुरू किया।
भारत की अनूठी बायोई3 नीति वैज्ञानिक प्रगति को सतत विकास से जोड़ती है। बायोफार्मा शक्ति मिशन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि विश्व बायो-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है। दस वर्षों की प्राथमिकताओं से आरजीसीबी आणविक जीवविज्ञान, जीनोमिक्स और कैंसर अध्ययन में अग्रणी बन गया है।
राजेश गोखले ने नीति के छह थीम्स, बायो-मैन्युफैक्चरिंग सहित, गिनाए और एचपीवी वैक्सीनेशन में संस्थान के डेटा के योगदान को रेखांकित किया। टी.आर. संतोष कुमार ने 600-700 सेल लाइन्स वाली सुविधा का जिक्र किया, जो वैश्विक संसाधन बनी है। नई सीजीएमपी यूनिट सस्ती जीन थेरेपी सुनिश्चित करेगी, चिकित्सा क्रांति लाएगी।