दिल्ली में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन का सबसे यादगार पल तब आया जब सात साल के रणवीर सिंह सचदेवा ने अपनी बुद्धिमत्ता से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। कम उम्र के प्रमुख वक्ता के तौर पर उन्होंने भारत की दार्शनिक विरासत को एआई से जोड़ने का अनोखा चित्रण किया।
अपने संबोधन में रणवीर ने युवा शक्ति की अहमियत बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राचीन भारतीय चिंतन आधुनिक तकनीक को दिशा प्रदान कर सकता है। वैश्विक एआई विकास के बीच भारत के योगदान पर उन्होंने प्रकाश डाला।
एक ताजा भारतीय एआई मॉडल को आधार बनाकर उन्होंने व्यावहारिक लाभ गिनाए। ऐसी तकनीकें देश की आर्थिक प्रगति और जीडीपी बढ़ोतरी में मील का पत्थर साबित होंगी।
तकनीकी क्रांति के दौर में रणवीर ने कहा कि एआई युवाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा। डिजिटल नेटिव्स जैसे जेन-जेड और अल्फा पीढ़ी इस परिवर्तन को गति देंगी।
वर्तमान में हो रहे निर्णय भविष्य के कार्य-जीवन को आकार देंगे, यह चिंता उन्होंने जताई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माता, व्यवसायी, वैज्ञानिक, उद्यमी और विद्यार्थी इस मंच पर आए, जहां एआई के हर पहलू पर चर्चा हुई।
रणवीर की प्रस्तुति ने साबित कर दिया कि छोटी उम्र भी बड़े विचारों का स्रोत बन सकती है, जो एआई को शाश्वत भारतीय मूल्यों से समृद्ध करेगी।