भारत के अग्रणी उद्योगपति मुकेश अंबानी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में बड़ा ऐलान किया—जियो व रिलायंस समूह सात वर्षों में एआई क्षेत्र में 10 लाख करोड़ रुपये निवेशेंगे। यह धैर्यपूर्ण निवेश राष्ट्र-निर्माण के लिए है, जो लंबे समय तक आर्थिक शक्ति प्रदान करेगा।
एआई में प्रतिभा भरी पड़ी है, लेकिन कंप्यूटिंग की कमी बड़ी समस्या है। जियो इंटेलिजेंस भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तीन साहसिक योजनाएं ला रहा है।
सबसे पहले, जामनगर में मल्टी-गीगावाट एआई डेटा सेंटरों का निर्माण तेजी से चल रहा है। 2026 के मध्य तक 120 मेगावाट प्लांट चालू हो जाएगा, जो गीगावाट कंप्यूटिंग का मार्ग प्रशस्त करेगा।
दूसरी योजना के तहत कच्छ व आंध्र में 10 गीगावाट सोलर एनर्जी तैयार है, जो एआई को हरी ऊर्जा देगी।
तीसरी, जियो के नेटवर्क पर आधारित एज कंप्यूटिंग जो कम विलंबता वाली सेवा हर भारतीय तक पहुंचाएगी।
यह एआई उन्नत विनिर्माण, कृषि, लघु उद्योगों तक फैलेगा, उत्पादकता में क्रांति लाएगा। जियो इंटेलिजेंस खोज से कहीं आगे, दक्षता का सशक्त माध्यम बनेगा।
भारतीय भाषाओं में शीर्ष एआई क्षमता विकसित होगी, ताकि किसान-कारीगर अपनी भाषा में लाभ लें और बच्चे मातृभाषा में सीखें।
एआई से नौकरी छिनने का डर भ्रम है—यह उच्च-कौशल रोजगार पैदा करेगा, रिलायंस प्रमाणित करेगा।
एआई अब इकोसिस्टम की दौड़ है। उद्यमों, स्टार्टअप्स, शैक्षणिक संस्थानों से साझेदारी कर ऊर्जा, खुदरा, स्वास्थ्य等领域 में एआई उतारेगा।
स्टार्टअप्स को किफायती संसाधन देकर, भारत वैश्विक नवाचारों का केंद्र बनेगा—हमारी बुद्धि, हमारे मूल्य, विश्व कल्याण के लिए।