दिल्ली के इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में विनोद खोसला ने भविष्यवाणी की कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पारंपरिक रोजगार को 2050 तक अप्रासंगिक बना देगा। सिलिकॉन वैली के निवेशक ने कहा कि एआई हर क्षेत्र में क्रांति लाएगा।
2025 तक संकेत मिलने लगेंगे। आईटी और बीपीओ जैसे व्हाइट-कॉलर क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। पांच सालों में ये कंपनियां विलीन हो सकती हैं, जबकि 2030 तक आउटसोर्सिंग उद्योग गायब।
भारत का आईटी सेक्टर, जो विकास का इंजन रहा, अब खतरे में। कई लोग अस्वीकार कर रहे हैं, लेकिन तकनीक सबको छुएगी। लंबी नौकरी की संस्कृति को खोसला ने पुरानी ठहराया—यह अनुकूलन क्षमता घटाती है।
सकारात्मक पक्ष पर, समिट की सफलता और भारत की एआई महत्वाकांक्षा की तारीफ। संवेदनशील क्षेत्रों के लिए स्वदेशी एआई जरूरी, विदेशी पर निर्भरता नुकसानदेह। सर्वम में निवेश से उनका साथ साबित होता है।
कर्मचारियों और सरकार को तत्काल तैयारी करनी चाहिए। एआई अवसर भी देगा, अगर सही दिशा में कदम उठाए जाएं। भारत वैश्विक नेता बन सकता है।