इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में एक्सपर्ट्स ने एआई को भारत का भविष्य बताया। उपयोगकर्ता बनने के बजाय सृजनकर्ता बनकर भारत वैश्विक समस्याओं के हल तैयार कर नौकरियों में इजाफा कर सकता है। सोमवार को नई दिल्ली में यह विचार प्रमुखता से सामने आए।
अंकुश सभरवाल ने जोर देकर कहा कि एआई ऐप्स का अभिन्न अंग बन चुका है। भारत को सृजन की राह पकड़नी चाहिए, जहां इंजीनियरों तक सीमित न रहकर हर कोई नवाचार कर सके और रोजगार बढ़े।
एफएओ के संजय सेठी के अनुसार, कृषि में एआई क्रांति लाएगा—मौसम समझ, खेती की जरूरतें और छोटी सप्लाई चेन। दो-तीन सालों में बदलाव साफ नजर आएंगे।
युवा इनोवेटर्स ने समिट को रोचक बनाया। अखिला का ‘देश के हाथ’ एआई ई-कॉमर्स है, जो पूरे देश के हस्तशिल्प को बिना बिचौलियों के बाजार से जोड़ता है।
सृष्टि पुरोहित का एनरविजन क्रॉनिक थकान सिंड्रोम के लिए वेब ऐप है, जो लगातार थकान, अनिद्रा और दर्द से जूझने वालों को मजबूत बनाता है, सामाजिक कलंक के बावजूद।
सुभांगी सिंह का इंटेलिजेंट ग्रेन स्टोरेज सिस्टम भंडारण की अवैज्ञानिक पद्धतियों पर प्रहार करता है। रीयल-टाइम ट्रैकिंग, पूर्व चेतावनी और ऑटो कंट्रोल से अनाज बर्बादी रुकेगी।
समिट से संदेश साफ है—एआई भारत को नवाचार और रोजगार का केंद्र बना सकता है।