2026 का प्रथम सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को अंटार्कटिका पर छाएगा, वलयाकार ‘रिंग ऑफ फायर’ के रूप में। चरम पर यह चमकदार वलय करीब ढाई मिनट तक दिखेगा। भारतीय आकाश इससे वंचित रहेगा।
सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की सीधी रेखा से ग्रहण बनता है। कक्षीय झुकाव के कारण द्विवार्षिक होता है। वलयाकार में दूर का चंद्रमा सूर्य को आंशिक ढकता है, अग्निमय अंगूठी रचता है।
ग्रहणों के चार रूप हैं। पूर्ण ग्रहण दिन को रात बनाता है, कोरोना प्रकट करता है। वलयाकार की रिंग आकर्षक है। आंशिक में सूर्य कटा-सा दिखता है। हाइब्रिड पृथ्वी की गोलेनुमा आकृति से दोहरा रूप धारण करता है।
इनसे विज्ञान लाभान्वित होता है, जैसे सूर्यलेखन। प्राचीन काल से सांस्कृतिक महत्व। आंखें बचाएं, विशेष उपकरणों से देखें।
यह ग्रहण ब्रह्मांड की सुंदरता की याद दिलाता है, आगे के आकाशीय प्रदर्शनों की ओर इशारा करता है। उत्साही तैयार हों।