केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईटी मद्रास के सहयोगी नवाचार ढांचे की सोमवार को खुलकर तारीफ की। रिसर्च पार्क में दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि तकनीकों का तुरंत बाजार में उतारना संभव हुआ है और यह पैटर्न अन्य संस्थानों द्वारा अपनाया जा रहा है।
इमर्सिव टेक्नोलॉजी लैब्स सहित सुविधाओं का निरीक्षण करते हुए उन्होंने ट्रैफिक समस्याओं से निपटने वाली शहरी योजनाओं, स्पेस टेक, स्वास्थ्य उपकरणों और न्यूरोसाइंस प्रोजेक्ट्स पर चर्चा की। उद्योगों का आरंभिक सहभागिता नवाचारों को जमीन पर उतारने में कारगर है, उनके अनुसार।
यह सिस्टम रिसर्च को बाजार योग्य उत्पादों में तेजी से परिवर्तित करता है। साइंस एंड टेक डिपार्टमेंट से मान्यता प्राप्त आईटीईएल, जुलाई 2024 में स्थापित, अकादमिक जगत, उद्योग प्रगणों और निवेशकों को एकजुट कर गहन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देता है।
विशेष आकर्षण रहा हैश्टिक प्रोजेक्ट, जो ऊंचे ट्रैक पर छोटे ई-वाहनों से शहरों के जाम को कम करने का वादा करता है—15 किमी का सफर मात्र 20 मिनट में। अग्निकुल कोसमॉस का मूल्यांकन भी हुआ, जो ऑन-डिमांड लॉन्च वाहनों पर कार्यरत है।
मई 2024 के सफल पहले प्रक्षेपण के बाद, आईएसआरओ समर्थित यह स्टार्टअप वर्षांत तक रीयूजेबल मिशन लाने को तैयार है, जो निजी कंपनियों की स्पेस महत्वाकांक्षाओं को मजबूत करता है।
मंत्री का दौरा भारत के तकनीकी उत्थान के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ।