भारतीय रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग को साइबर अपराधियों से मुक्त करने का संकल्प लिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि 2025 में 3.03 करोड़ से अधिक संदिग्ध आईडी निष्क्रिय की गईं। आधार आधारित सत्यापन और मजबूत साइबर ढांचे ने असली यात्रियों के हितों की रक्षा की है।
राज्यसभा में दिए गए जवाब में मंत्री ने खुलासा किया कि छह महीनों में 6,043 करोड़ मैलिशियस बॉट रिक्वेस्ट बाधित हुईं। साइबर क्राइम पोर्टल पर 376 शिकायतें 3.99 लाख फर्जी बुकिंग से जुड़ी रहीं, साथ ही 12,819 ईमेल डोमेन प्रतिबंधित किए गए।
तत्काल टिकटों पर विशेष नजर रखते हुए आधार-ओटीपी सिस्टम शुरू किया गया, जो बुकिंग के दौरान तत्काल पहचान जांच सुनिश्चित करता है। इससे एजेंटों और बॉट्स का दबदबा खत्म हो गया।
डीडीओएस, ब्रूट फोर्स जैसे खतरों से निपटने हेतु उन्नत कैप्चा और ओडब्ल्यूएएसपी सुरक्षा लागू हैं। सीडीएन नेटवर्क से वेबसाइट का लोड कम हुआ, जबकि एकेएएमएआई ने संदिग्ध ट्रैफिक को फिल्टर किया।
ये कदम न केवल बुकिंग प्रक्रिया को पारदर्शी बनाते हैं, बल्कि रेल यात्रियों को विश्वसनीय अनुभव प्रदान करते हैं, जो देश की रेल प्रणाली को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।