2035 तक एआई भारत की अर्थव्यवस्था में 550 अरब डॉलर का इजाफा कर सकता है, खासकर कृषि, शिक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य और मैन्युफैक्चरिंग में। PwC इंडिया की रिपोर्ट, जो दावोस में चर्चित रही, इसकी रूपरेखा प्रस्तुत करती है।
विश्व आर्थिक मंच से भारत ने एआई को समावेशी, शासित और संस्थागत रूप से मजबूत बनाने का संकल्प दिखाया। यह उभरते देशों के लिए बेंचमार्क साबित हो सकता है, जहां एआई सार्वजनिक सेवाओं और दैनिक कारोबार में घुल-मिल जाए।
3A2I फ्रेमवर्क इसकी कुंजी है—एक्सेस संसाधनों को उपलब्ध कराता है, स्वीकृति भरोसा जगाती है, एसिमिलेशन वर्कफ्लो में एकीकरण करता है। फिर कार्यान्वयन और संस्थागतकरण से उत्कृष्टता, स्थायित्व और अनुशासन आता है।
महाराष्ट्र में मैत्री प्लेटफॉर्म जैसे प्रयास निवेश सुगम बना रहे हैं। ऊर्जा में एआई मीटर चोरी पकड़ रहे, स्वास्थ्य में टीबी स्क्रीनिंग मजबूत हो रही।
यह न केवल आंकड़ों का खेल है, बल्कि भारत को तकनीकी महाशक्ति बनाने की दिशा में ठोस कदम है।