आयकर विभाग का नया ड्राफ्ट टैक्स फॉर्म नंबरिंग को सरल बनाने का वादा करता है। 1 अप्रैल से लागू होने वाले आयकर कानून 2025 के अनुरूप, यह बदलाव व्यक्तिगत करदाताओं से लेकर बड़ी कंपनियों तक सभी के लिए राहत लेकर आया है।
लंबे समय से जटिल हो चुकी पुरानी नंबरिंग से भ्रम दूर होगा। डिजिटल एकीकरण से जांच प्रक्रिया तेज होगी, लेकिन सॉफ्टवेयर बदलाव जरूरी हैं।
ऑडिट फॉर्म एकीकृत: 26 (3सीए-3सीडी के बदले), ट्रांसफर प्राइसिंग 48, एमएटी 66 (15% बुक प्रॉफिट टैक्स)। रेसिडेंसी 42, डीटीएए 41। टीडीएस: 128 (कम कटौती), 130 (सैलरी)। रिटर्न 138/140/144/143। स्टेटमेंट 168/165। रेमिटेंस 145/146।
यह कदम फाइलिंग को सुगम, गणना को स्पष्ट और नियमों को एकसमान बनाएगा। कर प्रक्रिया में नई गति का स्वागत है।