भारत को वैश्विक पटल पर लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण बने रहने के लिए व्यापारिक खुलापन और सुधारों को प्राथमिकता देनी चाहिए, यह कहना है सिस्टमैटिक्स की ताजा रिपोर्ट का। अमेरिका के साथ अंतरिम सौदे के संदर्भ में यह सलाह बेहद प्रासंगिक है।
रिपोर्ट सुझाव देती है कि उल्टे टैरिफ ढांचे दुरुस्त हों, कच्चे माल पर निर्भरता घटे जिसके लिए लॉजिस्टिक्स व सीमा शुल्क प्रक्रियाएं सुगम हों। असेंबली मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देकर पैमाने का लाभ उठाएं, रोजगार बढ़ाएं। संरक्षणवाद त्यागें, एफटीए बढ़ाएं, आरएंडडी को मजबूत करें, भूमि-श्रम-कौशल मुद्दों का समाधान करें।
ऐसी संयुक्त रणनीति से भारत एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में कूदेगा, जीवीसी से अटूट बंधन बनेगा और व्यापारिक तनावों से सुरक्षा मिलेगी। प्रतिस्पर्धा की होड़ में भारत अव्वल आएगा।
2026 के भारत-अमेरिका करार में बराबरी का जोर है। भारत अमेरिकी उत्पादों जैसे डीडीजीएस, ज्वार, मेवे, फल, तेल व मदिरा पर टैरिफ घटाएगा। अमेरिका भारतीय वस्त्र, चमड़ा, प्लास्टिक आदि पर 18 फीसदी शुल्क लगाएगा, लेकिन दवाएं, रत्न व एविएशन पार्ट्स पर छूट संभव।
यह ढांचा अमेरिका के लिए संतुलन लाएगा, भारत के लिए सस्ते बाजार। प्रभावी शुल्क 18 फीसदी रह जाएगा जो प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर। मेक इन इंडिया व आत्मनिर्भरता को गति मिलेगी।
विमान पुर्जों पर शुल्क समाप्ति व ऑटो कोटा से सेक्टरों को बल। भारत की आर्थिक उड़ान अब तय है।