नई दिल्ली से बड़ी खबर: छात्र मांग के चलते 2035 तक भारत 2.7 अरब वर्ग फुट नई शैक्षणिक जगह और 30,000 एकड़ कैंपस भूमि जोड़ेगा। इससे 100 अरब डॉलर के निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा, भारत को दुनिया के बड़े शिक्षा रियल एस्टेट बाजारों में ला खड़ा करेगा।
एनईपी 2020 के 50% जीईआर लक्ष्य के लिए 2.5 करोड़ नई सीटें चाहिए। कैंपस बनने में 100 अरब डॉलर खर्च, भूमि व हॉस्टल अलग। रिपोर्ट कहती है- जनसंख्या, नामांकन, वैश्विकरण व सुधारों से उच्च शिक्षा का विशाल निर्माण बाजार बनेगा।
नामांकन 2.7 करोड़ से 4.5 करोड़, यूनिवर्सिटी 760 से 1338, संस्थान 51 हजार से 70 हजार पर पहुंचे। बजट में यूनिवर्सिटी टाउनशिप का समर्थन अंतर स्वीकारोक्ति है।
एफएचईआई से टॉप विदेशी यूनिवर्सिटी सीधे कैंपस खोलेंगी। तीन खुले, 13 प्लान में- लैंकेस्टर, लिवरपूल, इलिनॉय टेक आदि। उत्तर प्रदेश की छूटें, गुजरात गिफ्ट सिटी का फ्रेमवर्क, महाराष्ट्र एजु-सिटी की पांच विदेशी पार्टनरशिप।
राज्यों की ये पहलें शिक्षा क्रांति लाएंगी, भारत को ज्ञान महाशक्ति बनाएंगी। निवेश व अंतरराष्ट्रीय विश्वास बढ़ेगा।