सार्वजनिक स्वास्थ्य को सशक्त बनाने के लिए भारत सरकार के हालिया टैक्स फैसले सराहनीय हैं। एम्स के ऑन्कोलॉजिस्टों के अध्ययन में सामने आया कि कैंसर दवाओं पर जीएसटी खत्म करना और तंबाकू पर 40 प्रतिशत टैक्स लगाना गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
जीएसटी परिषद ने पिछले साल सितंबर में 33 जरूरी दवाओं को टैक्स-मुक्त किया, जिनमें कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाएं प्रमुख हैं। पहले 12 और 5 प्रतिशत जीएसटी लगने वाली ये दवाएं अब सस्ती हो गईं। बजट में 17 कैंसर दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में कमी ने मरीजों को और राहत दी।
डॉ. अभिषेक शंकर, एम्स के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ ने बताया, ‘ये कदम कैंसर चिकित्सा को हर नागरिक के लिए उपलब्ध बनाते हैं। टैक्स राहत से मरीजों का आर्थिक तनाव काफी हल्का हुआ है।’
दूसरी ओर, 1 फरवरी से तंबाकू पर चरम 40 प्रतिशत जीएसटी लागू है। अध्ययन में कहा गया कि इससे समय से पहले मौतें टलेंगी, स्वास्थ्य खर्च घटेगा, जीवनकाल बढ़ेगा और विनाशकारी व्यय से बचाव होगा। तंबाकू कैंसर के 15 प्रतिशत केसों का जिम्मेदार है, जैसा कि डब्ल्यूएचओ ने बताया।
‘उच्च कर तंबाकू सेवन को हतोत्साहित करता है और स्वास्थ्य निवेश के लिए धन उपलब्ध कराता है,’ डॉ. शंकर ने कहा। समान चुनौतियों वाले देश इनसे सीख सकते हैं। अंततः, ये नीतियां स्वस्थ भारत की मजबूत नींव रखती हैं।