प्रसिद्ध निवेशक मार्क मोबियस ने बताया कि भारत का यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौता अमेरिका के लिए झटका साबित हुआ, जिसने भारत के साथ अपने सौदे को फौरन पूरा करने की प्रक्रिया तेज कर दी। बुधवार के बयान में उन्होंने इसकी विस्तृत पड़ताल की।
मोदी-ट्रंप की निजी निकटता ने सहायता प्रदान की, लेकिन मोबियस ने स्पष्ट किया कि सौदे की बारीकियां वार्ताकारों ने तय कीं। ‘ट्रेड डील्स का बाप’ जैसे शब्दों को वे अनुचित ठहराते हैं और ईयू समझौते को अधिक प्रभावशाली बताते हैं।
भारत ने ईयू के साथ आगे बढ़कर अपनी स्वायत्तता दिखाई, जिससे अमेरिका पर दबाव बना। यह कूटनीतिक चालाकी भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को मजबूत करती है।
आर्थिक मोर्चे पर मोबियस भारत के भविष्य को उज्ज्वल देखते हैं। देश निश्चित रूप से तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा, जिसमें युवाओं की भरमार और शहरीकरण उपभोग को बढ़ावा देगा। निर्यात में उछाल विकास को गति देगा।
बाजार के frसंदर्भ में, 1 लाख का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है। 20 प्रतिशत वृद्धि असंभव-सी लगती है। तथापि, जनसांख्यिकीय लाभ और व्यापारिक प्रगति भारत को लंबे समय तक मजबूत रखेंगे। निवेशक इन आधारों पर दांव लगाएं।