केंद्रीय बजट 2026-27 नजदीक आते ही शेयर बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। पिछले 15 वर्षों के आंकड़े स्पष्ट हैं—बजट से पहले निफ्टी -0.52 प्रतिशत औसतन गिरता है, सकारात्मक बंद सिर्फ 8 बार। सरकारी नीतियों के अचानक बदलाव का भय हावी रहता है।
बजट दिवस पर 2.65 प्रतिशत का इंट्राडे वोलैटिलिटी आम है। हाल के पांच वर्षों में चार प्री-बजट महीनों में निफ्टी नीचे रहा। हालांकि, बाद के हफ्ते में 1.36 प्रतिशत की औसत बढ़त दर्ज होती है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि बजट में आर्थिक विकास और वित्तीय संतुलन पर फोकस होगा। वैश्विक चुनौतियों जैसे अमेरिकी टैरिफ के बीच इंफ्रा, रक्षा, रेल पर खर्च बढ़ेगा। उद्योगों की अपील है—एमएसएमई सहायता, हरित ऊर्जा, एआई, निर्यात बढ़ावा।
जीडीपी का 4.4 प्रतिशत फिस्कल डेफिसिट, रोजगार और ग्रामीण मांग पर बल। केयरएज का पूर्वानुमान भी इसी पर केंद्रित, जिसमें भविष्य में उधारी 16-17 लाख करोड़ रहेगी।
चुनौतियां जैसे महंगी वैल्यूएशन, विदेशी बिकवाली बनी हुई हैं। सलाह है—बजट बाद तक कैश होल्ड करें, चुनिंदा क्षेत्रों पर दांव लगाएं।