सैन फ्रांसिस्को कोर्ट में मेटा के खिलाफ धमाकेदार मुकदमा दर्ज। व्हाट्सऐप यूजर्स का कहना है कि कंपनी उनके निजी चैट्स को स्टोर कर विश्लेषण करती है और कर्मचारियों को भी उपलब्ध करा सकती है। यह एन्क्रिप्शन सुरक्षा के दावों पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
भारत से दक्षिण अफ्रीका तक फैले ये प्लेंटिफ क्लास एक्शन स्टेटस की मांग कर रहे हैं, ताकि अरबों यूजर्स का प्रतिनिधित्व हो सके। आरोप है कि मेटा के आला अधिकारी उपयोगकर्ताओं को गुमराह करते रहे।
प्रतिक्रिया में मेटा ने कहा कि यह पूरी तरह निराधार है। व्हाट्सऐप का एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सिग्नल तकनीक पर टिका है, जो दस वर्षों से सक्रिय है। केवल यूजर ही मैसेज देख सकते हैं, कंपनी इसका उल्लंघन नहीं करती।
2009 में लॉन्च हुए इस ऐप को 2014 में फेसबुक ने महंगे दाम पर अधिग्रहित किया। मार्क जुकरबर्ग ने इसे इंटरनेट.ऑर्ग का हिस्सा बताया था। वर्तमान में 3 अरब यूजर्स वाले व्हाट्सऐप पर यह मुकदमा डिजिटल प्राइवेसी की नई जंग छेड़ सकता है।