ग्रीनलैंड को हासिल करने की अमेरिका की कोशिश ने निवेशकों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस विवाद से वैश्विक बाजारों में हलचल जारी रहने के आसार हैं।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने चेतावनी दी है कि सौदे की बारीकियां साफ होने तक निवेशक सतर्क रहेंगे। डेनमार्क और अन्य पक्षों से बातचीत का परिणाम बाजार की दिशा तय करेगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर ट्रंप ने दिलचस्पी जताई, मगर खनिज संपदा मुख्य कारण है। ब्रिटेन से फिनलैंड तक के देशों पर टैरिफ की चेतावनी ने यूरोप को उकसा दिया, जहां सैन्य गतिविधियां तेज हो गईं।
2026 में शुरू होने वाले 10 प्रतिशत टैक्स की योजना जून तक 25 प्रतिशत पहुंचने वाली थी। विश्व आर्थिक मंच में ट्रंप का नरम रुख सकारात्मक है, फिर भी नाटो-अमेरिका समझौते की अस्पष्टता चिंता बढ़ा रही है।
अदिति गुप्ता का कहना है कि आगे चर्चा में सैन्य उपस्थिति और संसाधनों पर फोकस होगा। यह 1951 समझौते की याद दिलाता है। निवेशक इस अनिश्चितता से जूझते हुए रणनीति बदल रहे हैं, बाजार की सुस्ती लंबी खिंच सकती है।