डॉक्टरी के सपनों को छोड़ हरियाणा के योगेश कथुनिया ने डिस्कस थ्रो में इतिहास रचा। 1997 में बहादुरगढ़ जन्मे योगेश को बचपन में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम ने जकड़ लिया। पैर खड़े न होने दिए, लेकिन मां मीना और थेरेपी ने सहारा दिया।
कॉलेज में सचिन यादव के प्रेरणा से पैरा स्पोर्ट्स में एंट्री। 2018 बर्लिन में विश्व रिकॉर्ड। 2020 टोक्यो में भारत को एफ56 रजत। अर्जुन अवॉर्ड मिला। 2022 की रीढ़ की बीमारी ने रोका, पर 2024 पेरिस और 2025 वर्ल्ड्स में दोबारा चमके।
शारीरिक कमजोरी के बावजूद योगेश ने साबित किया कि इच्छाशक्ति सब कुछ जीत लेती है। देश को गौरवान्वित करने वाली यह यात्रा लाखों को प्रोत्साहित करेगी।