भारतीय कुश्ती का परचम लहराने वाले बजरंग पुनिया का सफर गांव की मिट्टी से वैश्विक मंच तक प्रेरणादायक है। 1994 में हरियाणा के झज्जर में पैदा हुए पुनिया ने बचपन से ही अखाड़े में पसीना बहाया। पिता के मार्गदर्शन में 2008 से छत्रसाल स्टेडियम में ट्रेनिंग और 2013 से विदेशी मैट पर धमाल। 65 किग्रा फ्रीस्टाइल में वे अविजित रहे।
विश्व चैंपियनशिप में चार मेडल का विश्व रिकॉर्ड, टोक्यो ओलंपिक कांस्य, एशियाई खेलों में सोना-चांदी, कॉमनवेल्थ में कई स्वर्ण। सम्मान में अर्जुन, पद्मश्री, खेल रत्न। लेकिन 32 साल की उम्र में संकट आ गया। नाडा ने डोप टेस्ट सैंपल न देने पर 4 साल की सजा दी—23 अप्रैल 2024 से 22 अप्रैल 2028 तक।
बजरंग ने संन्यास नहीं लिया, लेकिन भविष्य अनिश्चित। यह घटना भारतीय खेलों में डोपिंग जांच की सख्ती को उजागर करती है। पुनिया जैसे योद्धा की कमी खलेगी, पर उनकी विरासत कुश्ती को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।