मैसूर के लाल गुंडप्पा विश्वनाथ भारतीय क्रिकेट के उन गिने-चुने बल्लेबाजों में शुमार हैं जिन्होंने टेस्ट डेब्यू पर शतक लगाया। 1949 में जन्मे विश्वनाथ का करियर अनोखा था—उनके हर शतक के बाद भारत हारा ही नहीं।
घरेलू स्तर पर दोहरा शतक उनकी पहचान बना। 1969 में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध पहली पारी में खाता नहीं खुला, लेकिन दूसरी में 137 रन ठोके। नेट प्रैक्टिस से परहेज उनकी रणनीति थी।
91 टेस्ट, 6080 रन, 14 सेंचुरी। अपने समय की सभी टीमों पर राज। चार मैच जीते, दस ड्रॉ। वनडे में 25 पारियां, 439 रन। 1983 तक सक्रिय।
संन्यास के बाद प्रशासन में योगदान—आईसीसी रेफरी, कर्नाटक उपाध्यक्ष, चयन समिति अध्यक्ष। अर्जुन अवॉर्ड से सम्मान। विश्वनाथ की कहानी कला और सफलता का संगम है।