भारतीय मुक्केबाजी के क्षितिज पर मोहम्मद हुसामुद्दीन एक चमकते सितारे हैं। निजामाबाद में पैदा हुए इस मुक्केबाज के पिता शम्सुद्दीन ने उन्हें जिम्नास्ट बनाना चाहा था, लेकिन घर का बॉक्सिंग माहौल कुछ और ही कहानी लिख गया। निखत जरीन के कोच शम्सुद्दीन के चार बेटों में हुसामुद्दीन ने सबसे बड़ी सफलता पाई।
उनके मेडल्स की फेहरिस्त लंबी है—नई दिल्ली इंटरनेशनल ओपन में कांस्य, 2018 और 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य। राष्ट्रीय स्तर पर सर्विसेज से तीन गोल्ड और एक सिल्वर। 57 किलो फेदरवेट और 56 किलो बैंटमवेट में उनका जलवा है।
अर्जुन अवॉर्ड विजेता हुसामुद्दीन मेहनती और लक्ष्यप्रधान हैं। उनकी सफलता भारत के खेल क्षेत्र में मुक्केबाजी की लोकप्रियता को मजबूत कर रही है।