भारतीय बैडमिंटन के आकाश पर किदांबी श्रीकांत का नाम चमकता है। किसान परिवार से निकलकर विश्व पटल पर धूम मचाने वाले इस शटलर का जन्म 7 फरवरी 1993 को आंध्र प्रदेश में हुआ। भाई नंद गोपाल की बैडमिंटन यात्रा देख सात साल की आयु में खेल अपनाया। विशाखापत्तनम साई केंद्र से गोपीचंद अकादमी तक का सफर मेहनत भरा रहा।
जूनियर स्तर पर 2011 में कॉमनवेल्थ रजत और दो स्वर्ण। कोच के कहने पर युगल छोड़ एकल अपनाया, तो 2013 थाईलैंड ओपन फतह। 2014 में लिन डैन पर ऐतिहासिक जीत से चाइना ओपन उनका। स्विस ओपन 2015 में इतिहास रचा। रियो 2016 क्वार्टर फाइनल।
2017 का जादुई साल—चार सुपर सीरीज जीत। चोट के बाद 2018 राष्ट्रमंडल स्वर्ण से नंबर-1। 2021 विश्व चैंपियनशिप रजत, 2022 थॉमस कप कप्तानी में स्वर्ण, राष्ट्रमंडल कांस्य-रजत। अर्जुन 2015, पद्म श्री 2018। श्रीकांत साबित करते हैं कि दृढ़ संकल्प से कुछ भी संभव है।