सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हिमाचल प्रदेश के सांसद अनुराग ठाकुर अब बीसीसीआई में पद संभाल सकते हैं। सात साल पुराने प्रतिबंध को हटाते हुए अदालत ने 2017 के आदेश में बदलाव किया है, जो क्रिकेट प्रशासन के लिए नया अध्याय खोल सकता है।
लोढ़ा कमेटी के कड़े नियमों – आयु सीमा, कार्यकाल और सरकारी पदों की पाबंदी – के चलते 2017 में ठाकुर को पदच्युत किया गया था। तब वे बीसीसीआई के अध्यक्ष थे और मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर ने उन्हें बोर्ड से अलग रखा।
वर्तमान बेंच ने साफ कहा कि यह प्रतिबंध स्थायी नहीं था। अनुराग ठाकुर द्वारा मांगी गई माफी को कबूल करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला ने उन्हें प्रशासनिक कार्यों में शामिल होने की छूट दी।
बीसीसीआई के सामने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप, महिला प्रीमियर लीग जैसे बड़े आयोजन हैं। ठाकुर का लौटना युवा प्रतिभाओं के विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सकारात्मक असर डाल सकता है। हालांकि, कुछ लोग राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका जता रहे हैं।
यह फैसला खेल कानून में लचीलापन दिखाता है। अनुराग ठाकुर की सक्रियता से भारतीय क्रिकेट वैश्विक पटल पर और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।