भारतीय एथलेटिक्स की शान दुती चंद का जीवन एक प्रेरणा गाथा है। जाजपुर के गरीब बुनकर परिवार में पैदा हुईं दुती ने आर्थिक तंगी के बावजूद ट्रैक पर रफ्तार दिखाई। सरस्वती दीदी की दौड़ देखकर मैदान में कूद पड़ीं।
स्कूल फीस का इंतजाम? खेलो और चैंपियन बनो—यही बहन का मंत्र। नंगे पैर सड़कों पर प्रैक्टिस, 2005 में हॉस्टल चयन, कोच महापात्रा से ट्रेनिंग। 2007 राष्ट्रीय पदक से शुरुआत।
सफलताओं का सिलसिला: 2012 अंडर-18 100 मीटर खिताब। 2013 एशियन कांस्य। 2014 दो जूनियर एशियन गोल्ड। हाइपरएंड्रोजनिज्म विवाद में एएफआई बैन, लेकिन सीएएस ने 2015 में न्याय दिया।
रिकॉर्डों की बौछार—60 मीटर 7.28, 100 मीटर 11.33 फेडरेशन कप में। कोसानोव में 11.24 रियो क्वालिफिकेशन। एशियन गेम्स 2018 रजत पदक। टोक्यो में दो इवेंट्स। दुती आज साहस और समर्पण की प्रतीक हैं।