भारतीय जूडो में सुशीला देवी लिकमाबम का नाम चमक रहा है। इंफाल के हेइंगांग में 1995 में पैदा हुईं सुशीला को चाचा लिकमाबम दीनीत ने सात साल की उम्र में जूडो सिखाया। खुमान लैम्पक से शुरूआत, फिर SAI मणिपुर और पटियाला में कठोर प्रशिक्षण।
पिता की सीमित आय से डाइट और यात्रा की समस्या। कई बार प्रतियोगिता छूट गईं, लेकिन जज्बा डगमगाया नहीं। सरकारी सहायता मिलने पर फोकस बढ़ा। 2014 में ग्लासगो कॉमनवेल्थ रजत पदक से धमाल मचा दिया।
साउथ एशियन गेम्स 2019 स्वर्ण, हांगकांग ओपन रजत। ओलंपिक 2020 में अकेली भारतीय। 2022 कॉमनवेल्थ रजत। सुशीला से स्वर्ण पदकों की उम्मीद। उनकी मेहनत लाखों को प्रेरणा देती है, खेल में सफलता के द्वार खोलती है।