आईसीसी महिला विश्व कप 2025 में भारत की ऐतिहासिक जीत ने कई दिल छू लेने वाली कहानियों को जन्म दिया है, जिनमें से एक है तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ की। उन्होंने न केवल देश के लिए विश्व कप ट्रॉफी उठाई, बल्कि अपने पिता, मुन्ना सिंह गौड़, के खोए हुए सम्मान को भी फिर से स्थापित किया। मुन्ना सिंह को 2012 में मध्य प्रदेश पुलिस से एक विवादित मामले में निष्कासित कर दिया गया था, जिसके बाद उनका परिवार लंबे समय तक कठिनाइयों से गुजरा।
दस साल से भी अधिक समय बीत जाने के बाद, क्रांति के विश्व कप में शानदार प्रदर्शन ने उस दुखद दौर को हमेशा के लिए मिटा दिया। भोपाल में आयोजित एक विशेष समारोह में, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुन्ना सिंह गौड़ की सेवा बहाली की घोषणा की। उन्होंने इस कदम को “एक ऐसे परिवार के लिए गरिमा की पुन: स्थापना” बताया जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी।
सीएम यादव ने कहा, “क्रांति ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उनके पिता के सम्मान की बहाली बिल्कुल सही है।” यह घोषणा मुख्यमंत्री निवास पर हुई।
एक वक्त के खाने से विश्व कप विजेता तक का संघर्ष
क्रांति गौड़ का क्रिकेट तक का सफर असाधारण दृढ़ संकल्प और त्याग का परिणाम है। छतरपुर, मध्य प्रदेश की रहने वाली क्रांति के पिता की बर्खास्तगी के बाद, गौड़ परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। क्रांति ने बताया, “ऐसे भी दिन थे जब हम मुश्किल से एक वक्त का खाना खा पाते थे।”
इस मुश्किल दौर के बावजूद, क्रांति ने हार नहीं मानी। अपनी तेज गेंदबाजी के प्रति अपने जुनून को आगे बढ़ाते हुए, उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई और विश्व कप से कुछ महीने पहले ही भारतीय टीम में जगह बना ली। उनकी कहानी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई, जो यह दर्शाती है कि कैसे अटूट लगन व्यक्तिगत कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर सकती है।
क्रांति गौड़: भारतीय गेंदबाजी की धुरी
मैदान पर क्रांति गौड़ का प्रदर्शन काबिले तारीफ रहा। उनकी रफ्तार, सटीकता और आक्रामकता ने उन्हें आईसीसी महिला विश्व कप 2025 में भारत की सबसे बड़ी खोजों में से एक बना दिया।
पूरे टूर्नामेंट में, उन्होंने आठ मैचों में नौ विकेट लिए। पाकिस्तान के खिलाफ बेहद कड़े मुकाबले में उनका प्रदर्शन विशेष रूप से यादगार रहा, जहाँ उन्होंने 3/20 के आंकड़े के साथ विपक्षी टीम पर दबाव बनाया। इसके अलावा, न्यूजीलैंड के खिलाफ एक अहम मैच में भी उन्होंने दो महत्वपूर्ण विकेट चटकाकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।
सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ, उन्होंने दिग्गज बल्लेबाज एलिसा हीली को आउट करके मैच का रुख भारत के पक्ष में मोड़ा, जो टीम की ऐतिहासिक जीत की नींव साबित हुआ।
मध्य प्रदेश की शान का अभिनंदन
क्रांति गौड़ के घर लौटने पर उनका ज़ोरदार स्वागत हुआ। मुख्यमंत्री मोहन यादव और खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने एक भव्य समारोह में क्रांति, उनके माता-पिता और उनके कोच को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने छतरपुर में ₹1 करोड़ का नकद पुरस्कार और एक विश्व स्तरीय क्रिकेट स्टेडियम बनाने की भी घोषणा की, जो स्थानीय युवा प्रतिभाओं को विकसित करने में मदद करेगा। इसके अतिरिक्त, 15 नवंबर को, जिसे आदिवासी गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है और स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की जयंती भी है, जबलपुर में क्रांति की उपलब्धियों के सम्मान में एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
