देशभर में ज्ञानदायिनी मां सरस्वती की पूजा के साथ बसंत पंचमी 23 जनवरी को धूमधाम से मनाई जाएगी। वहीं, देवघर के बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग में तिलकोत्सव का रोचक आयोजन होगा। महिलाओं द्वारा भगवान शिव को बारात का निमंत्रण देने वाली यह परंपरा शिवरात्रि तक जीवंत रहती है।
बाबा बैद्यनाथ को मनचाही इच्छा पूरी करने वाला शिवलिंग कहा जाता है। मंदिर सावन और महाशिवरात्रि पर विशेष आकर्षण का केंद्र बनता है। माघ शुक्ल पंचमी को बाबा के विवाह की शुरुआती रस्म तिलकोत्सव आयोजित होता है। मां पार्वती के गौरवग्राम मिथिला से आई महिलाएं मिष्टान्न, पुष्प-हार लेकर मंदिर सजाती हैं।
आरती और शृंगार के बाद गर्भगृह में धान की बाली, लड्डू, घी तथा गुलाल चढ़ाया जाता है। तिलक लगाने का सौभाग्य महिलाओं को मिलता है। प्राचीन त्रेता कालीन यह विधि ऋषि-मुनियों से होकर आज जन-जन तक पहुंची है।
कथा के अनुसार, सती का हृदय इसी स्थान पर गिरा, जो शिव-पार्वती के पवित्र मिलन का प्रतीक है। दर्शनार्थियों की भारी संख्या हर वर्ष बढ़ती जा रही है। तिलकोत्सव के साथ बसंत पंचमी देवघर को भक्तिमय बना देगी।