युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी की सातवीं लगातार जीत ने वैश्विक स्तर पर नेतृत्व की अधिकतम अवधि पर चर्चा तेज कर दी। राष्ट्रपति या संसदीय प्रणाली अपनाने वाले देशों में नियम अलग हैं। यहां प्रमुख देशों के नियमों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत है।
अमेरिका का नियम सख्त है—दो चार साल के कार्यकाल। फ्रांस में दो लगातार पांच साल के टर्म, 2008 के सुधारों के बाद। रूस ने 2020 में संविधान बदला, पुराने टर्म रीसेट हो गए, पुतिन 2036 तक बने रह सकते हैं। चीन 2018 से बिना सीमा के।
ईरान दो चार साल के टर्म देता है, ब्राजील भी यही। भारत में पीएम अनिश्चित काल तक—बहुमत मिले तो। ब्रिटेन, कनाडा में कोई संख्या सीमा नहीं, संसदीय समर्थन आधारित। पाकिस्तान औपचारिक राष्ट्रपति पद पर ढीले नियम।
जर्मनी की चांसलर मर्केल 16 साल चलीं, इजरायल ने पीएम लिमिट हटा ली। ये उदाहरण शक्ति संतुलन की कहानी कहते हैं, जहां कुछ देश अनुभव को प्राथमिकता देते हैं तो कुछ बदलाव को। युगांडा जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक मानदंडों पर पुनर्विचार की मांग करती हैं।