बांग्लादेश में चट्टोग्राम कोर्ट ने प्रमुख हिंदू कार्यकर्ता चिन्मय कृष्ण दास सहित 39 लोगों पर वकील सैफुल इस्लाम अलिफ की हत्या का आरोप लगाया है। नवंबर 2024 की यह घटना कोर्ट परिसर के बाहर हुई, जो सांप्रदायिक हिंसा का प्रतीक बन गई।
स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल के जज मोहम्मद जाहिदुल हक ने सुनवाई के बाद आरोप फ्रेम किए। सहायक लोक अभियोजक रेहानुल वाजेद चौधरी के अनुसार, चिन्मय पर हत्या और साजिश रचने के आरोप हैं, अन्य पर भिन्न धाराएं।
23 आरोपी हिरासत में, 16 भागे हुए। चिन्मय की अदालत पहुंच पर 900 सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया।
वकील न आने पर चिन्मय ने कोर्ट में खुद बयान दिया, हत्या से इंकार किया और जांच की अपील की। 26 नवंबर को जमानत रद्द होने पर हुई मारपीट में अलिफ मारा गया।
ढाका से पकड़े चिन्मय को जेल हुई, जिससे हिंदू समुदाय सड़कों पर उतरा। हसीना के बाद यूनुस सरकार में हिंदू लक्षित हमले बढ़े, भारत ने कड़ी चेतावनी दी।
मामला बांग्लादेश के अल्पसंख्यक अधिकारों और न्याय पर सवाल उठाता है।