नोएडा में इंजीनियर की मौत के सदमे ने बिल्डरों और प्राधिकरण की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सेक्टर-150 की निर्माण साइट पर दो बिल्डर कंपनियों के खिलाफ एफआईआर हो गई है। इन पर प्राधिकरण का 3000 करोड़ का बकाया होने के बावजूद सुरक्षा मानकों की जमकर धज्जियां उड़ीं।
साइट पर सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं था—न बाड़, न संकेतक। 7 जुलाई 2014 को स्पोर्ट्स सिटी के नाम पर दी गई जमीन को बिल्डर ने नियम तोड़कर बेच डाला, जिससे खेल विकास की योजना धरी रह गई।
केंद्रीय एजेंसियां सीबीआई-ईडी इस भूमि घोटाले की तह तक पहुंचने में लगी हैं। प्राधिकरण की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध है, जो न राशि वसूल सका, न मजदूरों की जान बचाई।
लोगों में आक्रोश है कि कड़ी निगरानी होती तो यह अनर्थ न होता। रियल्टी क्षेत्र में सुधार जरूरी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। जांच जारी है।