एचपीवी वैक्सीन सिर्फ लड़कियों की नहीं, लड़कों के लिए भी अनिवार्य होनी चाहिए। डॉ. मीरा पाठक ने बताया कि यह वायरस लिंग भेदभाव नहीं करता और पुरुषों में भी गंभीर कैंसर पैदा कर सकता है।
200 से ज्यादा स्ट्रेन वाले इस वायरस का संक्रमण अक्सर लक्षणरहित होता है। यौन मार्ग से फैलता है, जिससे अनजाने में पार्टनर प्रभावित होते हैं।
लो-रिस्क स्ट्रेन से गुप्तांग मस्से, हाई-रिस्क से कैंसर। पुरुषों में पेनाइल, एनल, ओरल कैंसर का खतरा।
पुरुषों को वैक्सीन न लेने से चेन बनी रहती है। टीकाकरण से व्यक्तिगत और सामुदायिक सुरक्षा।
आदर्श आयु 9-14 वर्ष (दो डोज), उसके बाद तीन डोज तक 45 वर्ष।
विकल्प: गार्डासिल 9 (ज्यादा स्ट्रेन), सर्वावैक (सस्ती)। सुरक्षित, हल्के साइड इफेक्ट।
समय रहते कदम उठाएं, स्वस्थ समाज बनाएं।