समुद्र को खेत बनाने का सपना साकार हुआ है। अंडमान सागर में भारत की पहली डीप-सी मछली पालन योजना धरातल पर उतर आई है। यह प्रयास समुद्री अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
लिटिल अंडमान के तट से 10 नॉटिकल मील दूर हेक्सागोनल केज लगाए गए हैं। ग्रुपर और सी बास जैसी मछलियों पर फोकस है। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के नेतृत्व में ₹50 करोड़ का निवेश किया गया। इससे घरेलू मांग पूरी होगी और आयात 20% कम होगा।
सेन्सर युक्त केज ऑक्सीजन और धाराओं की निगरानी करते हैं। श्रेणी-4 तूफानों का सामना कर सकते हैं। आईसीएआर-सीएमएफआरआई के सहयोग से वैज्ञानिक आधार मजबूत है। 200 युवाओं को एकीकृत प्रशिक्षण दिया गया।
शून्य अपशिष्ट, पर्यावरण-अनुकूल चारा और कोरल संरक्षण जैसी सुविधाएं हैं। स्थानीय जीडीपी में ₹100 करोड़ का इजाफा होगा। 95% उत्तरजीविता दर वाले परीक्षण सफल रहे।
लक्षद्वीप और गुजरात में विस्तार की योजना है। आत्मनिर्भर भारत के मत्स्य क्षेत्र में यह मील का पत्थर बनेगा।