आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने घरेलू मांग को विकास का इंजन बनाने पर बल दिया है। अपनी ताजा सर्वेक्षण रिपोर्ट में सीआईआई ने व्यवसायियों के 72 प्रतिशत का हवाला देते हुए कहा कि घरेली खपत अगले वित्तीय वर्ष की प्राथमिक वृद्धि शक्ति होगी।
रणनीति में मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं के अनुरूप राजकोषीय प्रोत्साहन प्रमुख हैं। आयकर छूट सीमा बढ़ाने से लेकर ईवी और हरित उपकरणों पर सब्सिडी तक सुझाव हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘घरेलू मांग आर्थिक आंकड़ा मात्र नहीं, बल्कि उद्योगों का जीवन रक्त है।’
कृषि से लेकर विनिर्माण और सेवा क्षेत्र तक अवसरों का जिक्र है। बेहतर एमएसपी से किसान आय बढ़ेगी, पीएलआई योजनाओं से मैन्युफैक्चरिंग को बल मिलेगा। डिजिटल समावेशन के लिए छोटे लेन-देन पर यूपीआई प्रोत्साहन जरूरी हैं।
4.5 प्रतिशत महंगाई और 7 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के परिदृश्य में ये सुधार 5 लाख करोड़ की अतिरिक्त मांग जोड़ सकते हैं। सीआईआई ने निर्यात निर्भरता कम करने की चेतावनी दी है।
आईसीआरआईईआर के अर्थशास्त्री ने इसे व्यावहारिक बताया। नॉर्थ ब्लॉक में चर्चाओं के बीच सीआईआई का विजन अनिश्चित समय में घरेलू शक्ति को भारत का कवच-कुंडल बनाता है, निवेश-रोजगार-सुख-समृद्धि का चक्र चलाएगा।