कुर्सी पर लंबे समय तक बैठने की आदत स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है। हृदय रोग और मानसिक सुस्ती जैसी परेशानियां बढ़ रही हैं। आयुर्वेद आधुनिक जीवन के अनुरूप प्राकृतिक उपचार सुझाता है। स्थिरता वात को असंतुलित कर संचार को बाधित करती है।
सुबह जल नेति से श्वसन मार्ग साफ करें। व्यायाम में तेज चलना या योग आसन अपनाएं। पोषण के लिए सुपाच्य खिचड़ी और रात को हल्दी वाला दूध लें। नस्य और प्राणायाम मानसिक स्पष्टता देते हैं। जल्दी भोजन और पैरों की मालिश (पदाभ्यंग) गहरी नींद में सहायक है। नाड़ी परीक्षण से अपनी प्रकृति जानकर सुधार करें। आयुर्वेद को जीवनसाथी बनाएं और अपनी फिटनेस को पुनः प्राप्त करें।