भारत की नीली क्रांति को गति मिल रही है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने घोषणा की कि समुद्री विज्ञान व बायोटेक्नोलॉजी आर्थिक विस्तार, पर्यावरण संरक्षण तथा रोजगार सृजन का आधार बनेंगे।
नीतिगत घोषणापत्र में सिंह ने समुद्री नवाचार के लिए संसाधन जुटाने की बात कही। मात्स्यकी, अपतटीय पवन ऊर्जा तथा जैव विविधता संपन्न पारिस्थितिक तंत्र बायोटेक हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हैं।
ब्लू इकोनॉमी 2.0 ढांचे के तहत समुद्री जीनोमिक्स, डिसेलिनेशन तकनीक तथा पर्यावरण अनुकूल शिपिंग में आरएंडडी के लिए अरबों आवंटित। सिंह ने कहा, ‘यह 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का केंद्रीय तत्व है।’
रोजगार रणनीति में 2028 तक 50 लाख युवाओं को एक्वाकल्चर व समुद्री इंजीनियरिंग में प्रशिक्षण। तटीय आर्थिक क्षेत्र सीफूड प्रोसेसिंग व बायोफार्मास्यूटिकल्स में निवेश आकर्षित करेंगे।
हरित मोर्चे पर केल्प फार्म तथा समुद्री सूक्ष्मजीवों से प्लास्टिक विघटन पर जोर। अंडमान व लक्षद्वीप में पायलट सफलताओं से मछली भंडार 40% बढ़े हैं।
नॉर्वे की एक्वाकल्चर मॉडल व जापान की गहरे समुद्र तकनीक को भारतीय संदर्भ में अपनाया जाएगा। रिलायंस व ओएनजीसी के साथ साझेदारी व्यावसायीकरण तेज करेगी।
अधिक मछली पकड़ना, तटीय कटाव तथा महासागरीय अम्लीकरण जैसी चुनौतियों का सामना पारंपरिक ज्ञान व एआई विश्लेषण से। सफलता के साथ समुद्री पुनरुत्थान की पटकथा लिखेंगे।