वैश्विक कंपनियों का पाकिस्तान से पलायन तेज हो गया है। वित्त मंत्री औरंगजेब के मुताबिक, ऊंचे टैक्स और ऊर्जा संकट ने इन्हें मजबूर किया है। यह खुलासा देश की आर्थिक कमजोरियों को उजागर करता है।
ऑटोमोटिव, गारमेंट्स और फार्मा कंपनियां देश छोड़ रही हैं। अरबों का निवेश व्यर्थ गया। मंत्री ने बताया कि बिजली के दाम क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों से तीन गुना ज्यादा हो गए हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में सर्कुलर डेब्ट 15 अरब डॉलर से ऊपर है। लोडशेडिंग और बार-बार टैरिफ बढ़ोतरी ने उद्योगों को परेशान कर दिया। ‘ये हालात वैश्विक प्रतिस्पर्धा असंभव बना रहे हैं,’ उद्योगपतियों की एक ही राय है।
सरकार टैक्स सरलीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर दे रही है। आईएमएफ से बातचीत चल रही है। लेकिन अमल में देरी ने अविश्वास बढ़ाया है। पिछले तिमाही में एफडीआई 20 प्रतिशत घटी।
उद्योग क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ रही है, सप्लाई चेन टूट रही है। पुनरुद्धार के लिए निजीकरण और पीपीपी मॉडल जरूरी हैं। मंत्री का बयान सकारात्मक है, पर सफलता नीतियों के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।