भारत का समुद्री क्षेत्र अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए नया इंजन बनेगा, यह भरोसा केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने व्यक्त किया। नीली अर्थव्यवस्था पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने समुद्री विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी की ताकतों को रेखांकित किया।
देश के विशाल महासागरीय संसाधनों का उपयोग कर ऑफशोर विंड फार्म, डिसेलिनेशन प्लांट और समुद्री सूक्ष्मजीवों से दवाएं विकसित होंगी। सिंह ने अनुमान लगाया कि दशकांत तक नीली अर्थव्यवस्था 100 अरब डॉलर जोड़ेगी। तटीय राज्यों में युवाओं को समुद्री इंजीनियरिंग और पर्यावरणीय मछली पालन में प्रशिक्षित किया जाएगा।
सतत विकास पर जोर देते हुए उन्होंने एआई आधारित मत्स्य निगरानी और मैंग्रोव पुनरुद्धार की योजनाएं बताईं। सागरमाला परियोजना बायोटेक पार्कों से जुड़ेगी। नॉर्वे की तर्ज पर सार्वजनिक-निजी साझेदारी बढ़ेगी।
‘हमारे युवा, वैज्ञानिक और समुद्र इस समृद्धि के स्तंभ हैं,’ सिंह ने कहा। वैश्विक स्तर पर भारत नेतृत्व करेगा, जो विकास और पारिस्थितिकी के संतुलन का प्रतीक बनेगा।