भारतीय परिवारों के लिए 2025 एक स्वर्णिम साल साबित हुआ, जब सोने की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल से उनकी कुल संपत्ति में 117 लाख करोड़ रुपये जुड़ गए। नवीनतम रिपोर्ट इस ऐतिहासिक वृद्धि को उजागर करती है।
परंपरागत रूप से सोना बचत का प्रमुख साधन रहा है, और इस साल यह उम्मीदों से कहीं आगे निकल गया। प्रति परिवार औसतन लाखों रुपये का लाभ हुआ, जो वैश्विक संकटों से उपजी मांग पर आधारित है।
त्योहारों, शादियों और निवेश खरीदारी ने घरेलू मांग को बल दिया। केंद्र सरकार की नीतियों ने भी आयात को सुगम बनाया। नतीजा? 25,000 टन से अधिक निजी सोने के भंडार का मूल्यांकन आसमान छू गया।
इस लाभ से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, जबकि युवा पीढ़ी डिजिटल गोल्ड में रुचि ले रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी इससे गति मिली।
हालांकि, ऊंचे दाम नई खरीदारी को प्रभावित कर रहे हैं। अर्थशास्त्री आगे के रुझानों पर नजर रखने की सलाह देते हैं।
यह वृद्धि उपभोक्ता खर्च, रियल एस्टेट और शिक्षा पर असर डालेगी। कुल而言, सोना एक बार फिर सिद्ध कर गया कि यह संकटों में सबसे सुरक्षित आश्रय है। भारतीय परिवार अब न केवल धनी हैं, बल्कि अधिक आत्मविश्वासी भी।