भारत में सर्वाइकल कैंसर का प्रकोप तेज हो रहा है। हर आठ मिनट में एक मौत – यह आंकड़ा डॉ. मीरा पाठक की चेतावनी से सामने आया है। महिलाओं की सेहत के लिए यह घंटी बेहद जरूरी है।
सालाना 1.23 लाख नई बीमारियां और 77 हजार मौतें दर्ज हो रही हैं। एचपीवी संक्रमण मुख्य वजह है, लेकिन टीके उपलब्ध होने पर भी कवरेज नगण्य है। जांच कार्यक्रम लक्ष्य से कोसों दूर हैं।
डॉ. पाठक ने स्वास्थ्य सम्मेलन में कहा कि गरीबी, अशिक्षा और लैंगिक असमानता जोखिम बढ़ा रही हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में दर राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है। कोविड ने जांच को 60 प्रतिशत घटा दिया।
सफल मॉडल मौजूद हैं। तमिलनाडु में जांच 15 प्रतिशत पहुंची है। एआई आधारित ऐप्स और मोबाइल यूनिटें ग्रामीण क्षेत्रों में मददगार साबित हो रही हैं। देसी एचपीवी वैक्सीन विकास की दिशा सकारात्मक है।
आवश्यक कदम: वैक्सीन सस्ती करें, आशा वर्कर्स को प्रशिक्षित करें, डिजिटल जागरूकता फैलाएं। डॉ. पाठक बोलीं, ‘महिलाओं को सशक्त बनाएं, वे ही पहली रक्षा रेखा हैं।’ नीतिनिर्माताओं को फंडिंग बढ़ानी होगी। महिलाओं का भविष्य दांव पर है – अब समय आ गया है बदलाव का।