पाकिस्तान की कर नीति पर सवाल खड़े कर रही नई रिपोर्ट, जिसमें सैनिटरी पैड पर 36 प्रतिशत का टैक्स अब भी लागू है। यह महिलाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा को नुकसान पहुंचा रहा है।
विश्लेषण से पता चलता है कि फेडरल और प्रांतीय टैक्स मिलाकर पैड की कीमतें आसमान छू रही हैं। शहरी झुग्गी-झोपड़ियों और गांवों में महिलाएं गंदे कपड़ों का सहारा ले रही हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ा है।
टैक्स स्ट्रक्चर में साफ-सफाई उत्पादों को लग्जरी आइटम्स के साथ रखा गया है, जो गलत है। बांग्लादेश जैसे देशों ने टैक्स कम कर उपयोग बढ़ाया है। पाकिस्तान में स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने का मौका गंवा दिया जा रहा है।
लाहौर-कराची में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। एनजीओ और प्रभावशाली लोग लड़कियों की कहानियां साझा कर रहे हैं। अर्थशास्त्री कहते हैं कि टैक्स हटाने से अर्थव्यवस्था को फायदा होगा।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि उत्पादों को पुनर्वर्गीकृत करें, उत्पादन को प्रोत्साहन दें। चुनाव आने वाले हैं, यह मुद्दा वोट प्रभावित कर सकता है। महिलाओं का सशक्तिकरण अब अनिवार्य है।