सर्द हवाओं में दो कदम चलते ही सांस फूल जाना कईयों की फितरत बन गया है। लेकिन चिकित्सक चेतावनी दे रहे हैं – ये लापरवाही बरतने का समय नहीं। गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सर्दी के परदे में छिपी हो सकती हैं।
पहली नंबर पर है हृदय रोग। ठंड से रक्त गाढ़ा हो जाता है, धमनियां सिकुड़ती हैं। पहले से मौजूद ब्लॉकेज वाले मरीजों में साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
दूसरा, फेफड़ों की पुरानी बीमारियां। अस्थमा, सीओपीडी पीड़ितों के लिए सर्द हवा जहर समान। प्रदूषण और धूल से नलियां बंद हो जाती हैं।
तीसरा, हार्ट फेलियर। फेफड़ों के आसपास पानी भर जाता है, हर सांस मेहनत बन जाती है। चौथा, लंग्स में ब्लड क्लॉट – पल्मोनरी एम्बोलिज्म, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
पांचवां, खून की कमी यानी एनीमिया। सर्दी में विटामिन की कमी से हीमोग्लोबिन घटता है, मांसपेशियों को ऑक्सीजन नहीं मिलती।
हाल के आंकड़े बताते हैं कि 65 प्रतिशत मरीजों में कोई न कोई गंभीर समस्या पाई गई। खासकर महिलाओं और डायबिटीज के मरीजों को सावधान रहना चाहिए।
क्या करें? लक्षणों का हिसाब रखें। आराम के बाद भी 5 मिनट तक सांस न संभले या सीढ़ियां चढ़ते वक्त बिगड़े तो तुरंत डॉक्टर के पास। घर पर ऑक्सीजन मॉनिटर रखें।
घरेलू नुस्खे भी कारगर: भाप-सेवन, शहद-अदरक का काढ़ा, धूप में टहलना। लेकिन असली इलाज है समय पर जांच। सर्दी को मौका न दें, स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
याद रखें, सांस लेना हक है, इसे बचाना फर्ज।