भारतीय शेयर बाजार में बल्क और ब्लॉक डील्स बड़े खिलाड़ियों के गुप्त हथियार हैं। ये न केवल अरबों का लेन-देन हैं, बल्कि बाजार की भविष्यवाणी करने का जरिया भी। हर निवेशक को इनका अंतर पता होना चाहिए।
बल्क डील का मतलब है एक दिन में 10 करोड़ या 0.5% इक्विटी से अधिक का ट्रेड, जो एक्सचेंज पर विशेष समय में होता है। पारदर्शी तरीके से, बाजार बंद होने पर डिटेल्स जारी—कौन बेचा, कितना, किस भाव पर। ये सामान्य ट्रेडिंग से अलग हैं।
ब्लॉक डील ज्यादा गोपनीय: संस्थानों के बीच सीधे समझौता, 10 करोड़+ मूल्य या 5 लाख शेयर। दो 15 मिनट की विंडोज में, ±1% रेंज में कीमत तय। बाद में रिपोर्टिंग होती है।
फर्क स्पष्ट: बल्क में एक्सचेंज प्राइसिंग, ब्लॉक में नेगोशिएटेड। बल्क अक्सर पोर्टफोलियो शिफ्ट दिखाती हैं, ब्लॉक मर्जर या स्टेक सेल के संकेत। जैसे, हाल के HDFC ब्लॉक डील ने शेयरों को उछाल दिया।
रिटेल निवेशक इनसे लाभ उठा सकते हैं। एक्सचेंज फाइल्स चेक करें, ट्रेंड्स पकड़ें। SEBI की सख्ती से बाजार सुरक्षित रहता है।
बाजार की इस पाठशाला में महारत हासिल करें, सफलता निश्चित।