पाकिस्तान में खाद्य असुरक्षा तेजी से बढ़ रही है, जो स्वास्थ्य प्रणाली और आर्थिक पुनरुद्धार को जोखिम में डाल रही है। जलवायु आपदाओं ने सिंध और बलूचिस्तान की कृषि भूमि को डुबो दिया, जिससे प्रमुख फसलें तबाह हो गईं। मुद्रा अवमूल्यन और आयात निर्भरता ने आटे और खाद्य तेल की लागत को बढ़ा दिया है। अस्पतालों में बच्चों में गंभीर कुपोषण के मामले बढ़ रहे हैं। आर्थिक दृष्टि से संकट विकास क्षमता को खोखला कर रहा है क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा खाद्य आयात पर खर्च हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक प्रगति के लिए भंडारण बुनियादी ढांचे और फसल बीमा में निवेश जरूरी है।
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