भारत और चीन में कोयले आधारित बिजली उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है, वहीं हरित ऊर्जा स्रोतों का उपयोग तेज रफ्तार पकड़ रहा है। ताजा रिपोर्ट इस प्रवृत्ति को वैश्विक ऊर्जा संक्रमण का प्रतीक बता रही है।
दोनों देशों के कोयला संयंत्रों में उत्पादन क्षमता घटी। भारत में कोयला खपत सालाना 12 प्रतिशत कम हुई, सोलर और हाइड्रो के बढ़ने से। चीन ने कोयला कटौती को बढ़ावा दिया, कार्बन न्यूट्रलिटी लक्ष्य के तहत।
हरित क्षेत्र में प्रगति उल्लेखनीय है। भारत का सोलर कैपेसिटी 100 गीगावाट को पार कर गई, विंड में तमिलनाडु अग्रणी। चीन ने 120 गीगावाट सोलर जोड़ा, जो दुनिया का सबसे बड़ा है। हाइड्रोजन और बायोमास भी योगदान दे रहे।
कारण स्पष्ट हैं—तकनीकी प्रगति से सोलर की लागत कोयले से कम, सरकारी नीतियां और स्वास्थ्य लाभ। दोनों देशों में निवेश हरे बांडों में उमड़ रहा है।
पर्यावरणीय सुधार दिखे, जैसे दिल्ली-बीजिंग में वायु गुणवत्ता। नौकरियां हरे क्षेत्र में सृजित हो रही हैं। ग्रिड और स्टोरेज चुनौतियां हैं, लेकिन समाधान निकल रहे।
रिपोर्ट कहती है, एशिया हरी क्रांति चला रहा। भारत-चीन का सहयोग शून्य उत्सर्जन की ओर ले जा रहा है, वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए संदेश है।