पीएम मोदी के कुशल मार्गदर्शन में भारत का उद्यमिता परिदृश्य बदल गया है। स्टार्टअप फाउंडर्स डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को व्यापार सरलीकरण का श्रेय देते हैं। कुछ वर्षों में मुट्ठीभर से बढ़कर अब अरबों डॉलर का इकोसिस्टम तैयार हो चुका।
डिजिटल क्रांति के केंद्र में यूपीआई है, जो मासिक 12 अरब ट्रांजेक्शन संभालता है। ओएनडीसी छोटे विक्रेताओं को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ता है। ‘पेपरलेस और बॉर्डरलेस व्यापार संभव हुआ,’ कहा स्टार्टअप समिट में फिनटेक फाउंडर अमित गुप्ता ने।
स्टार्टअप इंडिया से रजिस्ट्रेशन में उछाल आया। आसान एफडीआई और सिंगल विंडो सिस्टम ने बाबूगिरी कम की। हर राज्य में इनक्यूबेटर्स नवाचार को बढ़ावा दे रहे।
एग्रीटेक से स्पेसटेक तक विविध क्षेत्र फल-फूल रहे। आत्मनिर्भर भारत ने कोविड में लचीलापन दिखाया।
ग्रामीण स्टार्टअप्स अब ग्लोबल निवेशकों तक पहुंच रहे। ‘डिजिटल इंडिया ने समानता लाई,’ कही एडटेक इनोवेटर नेहा रेड्डी ने। 2025 तक जीडीपी में 10% योगदान का लक्ष्य साकार होता दिख रहा।