विश्व की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था भारत वित्त वर्ष 2026 में 7.5-7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि हासिल करने की ओर अग्रिम है। नई रिपोर्ट ने इस सकारात्मक आकलन के साथ कई क्षेत्रीय कारकों को रेखांकित किया है।
निजी खपत, जो जीडीपी का 60 प्रतिशत से अधिक है, मुद्रास्फीति से अधिक मजदूरी वृद्धि से प्रेरित हो रही है। सरकारी पूंजीगत व्यय राजमार्ग, रेल और हवाई अड्डों में प्रवाहित हो रहा है।
डिजिटल सेवाएं, फिनटेक और ई-कॉमर्स महामारी के बाद उछाल पर हैं। उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन योजनाओं से एप्पल जैसी कंपनियां उत्पादन बढ़ा रही हैं।
कृषि क्षेत्र उन्नत सिंचाई से लाभान्वित होगा। निर्यात रुपये स्थिरता पर निर्भर। रिपोर्ट ने तेल मूल्य वृद्धि से वर्तमान खाता घाटे पर चिंता जताई।
भारत के मैक्रोआर्थिक मूल्यांकन मजबूत हैं: कम कर्ज-जीडीपी अनुपात, विदेशी मुद्रा भंडार। रेटिंग एजेंसियां अपग्रेड कर सकती हैं।
आत्मनिर्भर भारत की पुष्टि करता यह पूर्वानुमान श्रम कानूनों में सुधार की मांग करता है। 2030 तक 7%+ विकास की उम्मीद है।